छत्तीसगढ़

सावधान मनरेगा का नया अवतार VB G RAM G छीन लेगा आपके काम का कानूनी अधिकार…

रायपुर – छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली ‘मनरेगा’ (MGNREGA) योजना के भविष्य को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आ रही है। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन (RGPRS), छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस महासचिव तरूण खटकर ने आगाह किया है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया जा रहा मनरेगा का नया स्वरूप— VB G RAM G —मजदूरों के ‘काम के कानूनी अधिकार’ को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है।

हक से ‘मांगने’ का दौर खत्म अब सरकार की ‘इच्छा’ पर निर्भर

कांग्रेस की मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत इसका ‘मांग-आधारित’ होना था। कानूनन, अगर मजदूर काम मांगता था, तो सरकार को 15 दिनों के भीतर काम देना ही पड़ता था, अन्यथा बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था। लेकिन मनरेगा के नए अवतार भाजपा की VB G RAM G के बाद यह ‘आपूर्ति-आधारित’ हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब काम मजदूर की जरूरत पर नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय किए गए बजट और ‘अधिसूचित क्षेत्र’ के आधार पर मिलेगा। बजट खत्म होते ही काम बंद कर दिया जाएगा, जिससे रोजगार की गारंटी का मूल उद्देश्य ही समाप्त होने का खतरा है।

60 दिनों का ब्लैकआउट सबसे जरूरत के समय ही मिलेगा धोखा

VB G RAM G का सबसे विवादित हिस्सा 60 दिनों का ‘ब्लैकआउट पीरियड’ है। खेती के पीक सीजन के दौरान, जब मजदूरों को काम की सबसे ज्यादा तलाश होती है, तब सरकार ने प्रावधान किया है कि वह दो महीनों तक कोई काम नहीं देगी। तरूण खटकर का मानना है कि यह मजदूरों की मोलभाव करने की ताकत को कम करने और उन्हें कम मजदूरी पर निजी क्षेत्रों के पास काम करने के लिए मजबूर करने का एक तरीका है।

राज्यों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

VB G RAM G में मजदूरी के भुगतान के फार्मूले में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जो राज्यों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करेगा।

कांग्रेस सरकार के (MGNREGA) में केन्द्र सरकार का अंश 90% और राज्य सरकार 10% होता था अब
भाजपा सरकार (VB G RAM G)
केंद्र सरकार का अंश 60%और
राज्य सरकार का अंश 10%होगा

छत्तीसगढ़ सहित देश के गरीब राज्यों में जहां काम की सबसे ज्यादा जरुत होती है ऐसे राज्यों के लिए यह 40% का हिस्सा एक भारी वित्तीय बोझ साबित होगा। आशंका है कि बजट की कमी का बहाना बनाकर राज्य सरकारें काम की मांग को ही दबा देंगी, जिससे सीधे तौर पर गांव का गरीब वर्ग प्रभावित होगा।

दिल्ली तय करेगी गांव का काम पंचायती राज पर प्रहार

पंचायती राज व्यवस्था के तहत अब तक ‘ग्राम सभा’ यह तय करती थी कि गांव के विकास के लिए कौन सा काम जरूरी है। लेकिन नए बिल के अनुसार, अब योजनाओं का खाका गांव की चौपाल पर नहीं, बल्कि दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी तैयार करेंगे। पंचायतों की भूमिका अब केवल ‘डेटा सेंटर’ तक सीमित रह जाएगी और स्थानीय जरूरतों की पूरी तरह अनदेखी की जाएगी।

तकनीकी बाधा बायोमेट्रिक की अनिवार्यता

एक और गंभीर बाधा ‘अनिवार्य बायोमेट्रिक हाजिरी’ और भुगतान को लेकर है। खेतों और निर्माण कार्यों में कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों के हाथों की लकीरें अक्सर घिस जाती हैं। यदि मशीन ने अंगूठा स्वीकार नहीं किया, तो मजदूर को पूरे दिन की मेहनत के बाद भी मजदूरी से हाथ धोना पड़ेगा।

तरूण खटकर के अनुसार, यह बदलाव मनरेगा की मूल भावना ‘असीमित फंड और काम की गारंटी’ पर सीधा हमला है। यह गरीबों को उनके कानूनी हक से वंचित कर उन्हें फिर से सरकार की ‘मेहरबानी’ पर निर्भर बना देगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी के हालात दोबारा पैदा होंगे और पलायन का डर है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Latest
छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 129 के तहत सीमांकन कराने हेतु किया गया आवेदन... शिव महापुराण में वर्णित त्याग और सहयोग का अद्भुत प्रसंग है समुद्र मंथन की कथा... कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने जलीय जीव जंतुओ के संरक्षण के लिए दिलाई शपथ... सावधान मनरेगा का नया अवतार VB G RAM G छीन लेगा आपके काम का कानूनी अधिकार... अवैध कब्जाधारी के द्वारा दि गई झूठे केश में फंसाने की धमकी की शिकायत पर ईमानदार पुलिस अधिकारी शिव कु... कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने बरमकेला क्षेत्र के 3 छात्रावासों का किया निरीक्षण... आंगनबाड़ी में बच्चों को नाम, अक्षर ज्ञान, गिनती, बोलने का आत्मविश्वास के बारे में सीखाना चाहिए : कले... सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांग की गई जानकारी... बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ी हुई तो संबंधित अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई : कलेक्टर डॉ... सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांग की गई जानकारी...