छत्तीसगढ़

कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने सहकारी समितियों में खाद बीज की स्थिति का जायजा लिया…

सारंगढ़ बिलाईगढ़ – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को पर्याप्त खाद बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने सारंगढ़ विकासखंड के सेवा सहकारी समिति कोतरी और हरदी का निरीक्षण किया। डॉ संजय कन्नौजे ने कोतरी समिति में आए किसान से खाद बीज उठाव के संबंध में पूछताछ किया। कलेक्टर ने इन दोनों समितियों के प्रबंधक से खाद बीज की भंडारण और किसानों द्वारा उठाव की जानकारी ली और निर्देश दिए कि बड़े किसान सहित सभी किसान जिनके घर, भंडार कक्ष, खलिहान आदि में खाद भंडारित करने का पर्याप्त स्थान है तो वे अपने समिति से खाद बीज का उठाव शीघ्र कर लें। यदि खाद बीज का उठाव होगा तब ही अपने उच्च कार्यालय से खाद बीज की मांग जाएगी, जिसके आधार पर आगामी दिनों में और खाद बीज केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। इसलिए किसानों द्वारा खाद बीज का उठाव करना जरूरी है।

*निजी कृषि केंद्रों में छापामार कार्रवाई*
कलेक्टर डॉ कन्नौजे ने कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने फील्ड में जाएं और निजी दुकानों के खाद बीज की स्थिति की जांच करें। यदि अधिक और अवैध भंडारण किया गया है तो ऐसे समिति पर कार्रवाई करें।

*समिति प्रबंधको ने दी जानकारी*

कोतरी के प्रबंधक ईश्वर साहू ने कलेक्टर को जानकारी दी कि उनके समिति में 450 बोरी स्वर्णा बीज और डीएपी खाद 500 बोरी, सुपर फास्फेट खाद 600 बोरी और यूरिया 1400 बोरी भंडारित किया गया है। इसी प्रकार हरदी समिति प्रबंधक ने कलेक्टर को जानकारी दी कि उनके यहां 1050 बोरी स्वर्णा और 1120 यूरिया खाद भंडारित है। निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त सहकारिता व्यासनारायण साहू उपस्थित थे।

*डीएपी के बदले यूरिया, सुपर फास्फेट खाद का उपयोग करे किसान*

आगामी जून जुलाई की खरीफ फसल सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के किसान मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। इस फसल में प्रमुख खाद यूरिया एवं डीएपी का बहुतायत में उपयोग किया जाता है। जिले के किसानों को सुगमतापूर्वक रासायनिक खाद उपलब्ध कराने हेतु अग्रिम उठाव करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष डी.ए.पी. की अल्प आपूर्ति संभावित है, जिसको देखते हुए उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव ने जिले के किसानों को अन्य विकल्प के खादों का उपयोग करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि सभी कृषि साख समितियों में खाद का भंडारण किया जा रहा है। सभी किसान अपने समिति में जाकर खाद की उपलब्धता पर खाद का उठाव अपनी सुविधा अनुसार शीघ्र कर लें। यूरिया सुपर फास्फेट का उपयोग डीएपी के विकल्प के रुप में किया जा सकता है जो कि विपणन संघ के डबल लॉक में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायी जा रही है। प्रारंभिक डोज के रुप में पौधों को फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है जो एसएसपी में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह जड़ों के विकास के लिए आवश्यक है। एसएसपी के उपयोग से 16 प्रतिशत फॉस्फोरस,11 प्रतिशत सल्फर तथा 18-21 प्रतिशत कैल्शियम प्राप्त होता है। एक बोरी डीएपी से मिलने वाले तत्वों की पूर्ति हेतु आधा बोरी यूरिया तथा तीन बोरी एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का प्रयोग किया जा सकता है। अन्य वैकल्पिक उर्वरकों का अनुशंसित मात्रा उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।

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