छत्तीसगढ़

अनुसूचित जनजाति की महिला किसानों को 2-2 दुधारु गाय दिए जाएंगे…

6 जिलों से पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत...

सारंगढ़ बिलाईगढ़ – छत्तीसगढ़ सरकार ने अब आदिवासी जिलों में गाय बांटने की शुरुआत कर दी है। इसके तहत अनुसूचित जनजाति की महिला किसानों को 2-2 दुधारु गाय दिए जाएंगे। फिलहाल यह योजना पायलेट प्रोजेक्ट में रूप में 6 जिलों से शुरुआत की जा रही है, जिसमें जशपुर, बलरामपुर, कांकेर, कोंडागांव,
महासमुंद, सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला शामिल है। उप संचालक पशुधन डॉ महेंद्र पांडेय ने जिले के आदिवासी महिलाओं को इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी और कहा कि वे इसका लाभ उठाएं। इस कार्यक्रम में हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया। जिले में 45 हितग्राही का चयन हो गया है। हितग्रहियों ने अपना अंशदान जमा कर वे ऋण के लिए बैंक में दस्तावेज जमा किए हैं। जल्द ही इनको गाय वितरण किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद आने वाले समय में इसका अन्य जिलों में विस्तार किया जाएगा। यह राज्य में डेयरी उद्यमिता को प्रोत्साहन देने, दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण में वृद्धि करने के लिए की जा रही है। हितग्राही को इसके लिए, डेयरी सहकारी समिति की सदस्य होनी चाहिए या दूध समिति में शामिल होने और नियमित रूप से दूध प्रदान करने के लिए सहमत हो।
पशु आवास सुविधा (कच्चा या पक्का) लाभार्थी के घर में उपलब्ध होनी चाहिए। किसी भी बैंक या स्थानीय सोसायटी में 90 दिनों से अधिक ऋण बकाया नहीं होनी चाहिए।
पशुपालन का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए या पशु प्रेरण से पहले प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए सहमत होना होगा।
केवल अनुसूचित जनजाति महिला ही योजना की पात्र होंगी।
दुग्ध महासंघ की डेयरी सहकारी समितियों के बाहर दूध नहीं देंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। 750 नवीन दुग्ध, मत्स्य तथा वनोपज समितियों का गठन किया जा चुका है। एक लाख किसानों का कोआपरेटिव बैंकों में नवीन खाता खोला गया है। दुधारू पशुओं को देने से किसान आर्थिक रूप से भी सक्षम होंगे।
दुधारू पशु के अलावा राज्य शासन से शत प्रतिशत अनुदान पर आदिवासी किसानों को नि:शुल्क एक वर्ष तक ’’हैंडहोल्डिंग’’ सेवाएं भी मिलेगी। इसमें एक वर्ष के लिए बीमा, पशु निगरानी उपकरण, पशु आहार (पशु चारे, खनिज मिश्रण, साइलेज/ चारा) एवं प्रशिक्षण शामिल रहेगा। चयनित परिवार अपनी पसंद से गाय या बकरी खरीद सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार पशु मूल्य का 50 प्रतिशत अनुदान देगी। जबकि लाभार्थी को केवल 10 प्रतिशत योगदान देगा। शेष 40 प्रतिशत बैंक ऋण के रूप में अंशदान होगा, जिसकी किस्त दूध के बिल से समायोजित की जाएगी।

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