लक्ष्मी को वरन करके लाना चाहिए हरण करके नहीं– भाई श्यामसुंदर पटेल…
लक्ष्मी को जबरदस्ती हरण करके लाने पर वह कभी भी लंका की भांति विनाश कर सकती हैं--- भाई श्यामसुंदर पटेल...

सारंगढ़
बिलाईगढ़ – धर्म एवं आध्यात्म की नगरी शिवरीनारायण से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व दिशा में स्थित ग्राम कुम्हारी में मानस प्रचार समिति का गठन आसपास के मानस प्रेमी, प्रमुखों को लेकर किया गया है। मानस प्रचार समिति द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि माह के अंतिम रविवार को दोपहर 2:00 बजे से 5:00 बजे तक मानस प्रवचन एवं बीच-बीच में भगवत भजन का आयोजन किया जावे। इसी तारतम्य में दिनांक 30.8.2026 रविवार को मानस प्रवचन का आयोजन ग्राम कुम्हारी के सड़क पारा में किया गया।
इस राम कथा प्रवचन माला में ग्राम धमलपुर से गंगाराम कैवर्त, पुरगांव से सीताराम डडसेना मुकुंदराम जायसवाल, कौवाताल से गंगाराम पटेल, बेलटिकरी से कृष्णा जायसवाल, हसुवा से दिलीप साहू ने भक्तिमय ज्ञानवर्धक मानवता से परिपूर्ण रामकथा सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिये।ग्राम कुम्हारी से अमृतलाल पटेल एवं नेहरू प्रधान ने सुमधुर भजन एवं आरती गाए। तबला में संगत ग्राम कोरकोटी निवासी मोहरसाय पटेल एवं कुम्हारी के शंकरदास मानिकपुरी ने दिए। मंच का सफल संचालन मानस प्रचार समिति के अध्यक्ष गिरौदपुरी निवासी राधेलाल गुरुजी ने किया। इस प्रवचन माला का लाइव प्रसारण ग्राम कुम्हारी निवासी कृष्णचरण पटेल ने कृष्णा प्रोडक्शन के माध्यम से किया। मानस प्रचार समिति द्वारा इस प्रवचन माला को सुनने देखने के लिए कृष्णा प्रोडक्शन चैनल को लाईक एवं सस्क्राइब करने के लिए निवेदन किए हैं।
ट्रांस महानदी क्षेत्र के प्रमुख रामायणी एवं श्रीराधा कृष्ण मंदिर समिति शिवरीनारायण के प्रवक्ता ग्राम बांसउरकुली निवासी भाई श्यामसुंदर पटेल ने भी इस प्रवचन माला में उपस्थित होकर प्रवचन किया। उन्होंने अपने सारगर्भित प्रवचन में बालकांड के प्रारंभिक वंदना प्रसंग पर मां भगवती सीताजी की वंदना प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने किए हैं उस पर अपना विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा कि श्रीसीताजी इस जगत की उत्पन्न पालन संहार करने वाली श्रीरामचंद्रजी के वल्लभा हैं।श्रीसीताजी मां भगवती लक्ष्मीजी का अवतार है ।सीताजी का लालन-पालन जनकपुर में हुआ। महाराज जनकजी उस काल में विश्व के सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी एवं बैरागी थे। उनके ज्ञान एवं वैराग्य को मानस में इस तरह से चित्रित किया गया है ।जासु ज्ञान रवि भव निशी नासा। वचन किरण मुनि कमल विकासा।। सहज विराग रूप मन मोरा। थकित होत जिमि चंद चकोरा।। इसका तात्पर्य है कि सीताजी अर्थात भक्ति देवी को चिरकाल तक सुरक्षित रखना है तो ज्ञान और वैराग्य का जीवन में होना अति आवश्यक है। इसलिए मानस के उत्तरकांड में लिखा है कि- विरति चर्म असि ज्ञान मद लोभ मोह रिपु मारि। जय पाइय सोई हरिभगति देखु खगेश बिचारि।।
आगे मानस प्रवक्ता भाई श्यामसुंदर पटेल ने श्री सीताजी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्री सीता जी अयोध्या में भी आई और रावण द्वारा जबरदस्ती हरण करके ले जाने पर लंका में भी गई। सीताजी अर्थात लक्ष्मी (रुपया पैसा धन संपत्ति आदि )को जब वरन करके लाया जाता है तो वह सुख शांति वैभव संपन्नता प्रदान करती हैं। श्रीसीताजी को रामचंद्रजी के द्वारा महाराज जनक के धनुष यज्ञ में धनुष को तोड़कर के वरन करके अयोध्या में लाते हैं, इसलिए सीताजी अयोध्या में सुख शांति वैभव संपन्नता की सृष्टि करती हैं। उसी सीता जी को रावण जबरदस्ती अपनी इच्छा से हरण करके लंका ले गया तो सीताजी ने वहां लंका का सर्वस्व विनाश कर दी। हमारे भारत देश के प्रसिद्ध संत कबीरदासजी ने कहा कि– एक लाख पुत सवा लख नाती। ता रावण घर दिया न बाती। इसलिए सीता जी को अर्थात लक्ष्मी को परिश्रम करके सही मार्ग से लाना चाहिये। विवेक विचार पूर्वक रूपया पैसा को अपने बाल बच्चों के उचित देखभाल, लालन पालन में खर्च करना चाहिए। उसके बाद भी बच जाए तो उसे समाज के दिन दुखी गरीब अंधे लूले लंगड़े को दान के रूप में देना चाहिए। इस तरह से लक्ष्मी को लाने एवं उपयोग करने से लक्ष्मी हमारे लिए इस लोक में भी और मरने के बाद अच्छे कार्य में उपयोग होने से परलोक में भी सुख शांति आनंद प्रदान करती हैं।
कथा के अंत में मानस प्रचार समिति के संयोजक नेहरू लाल प्रधान ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी श्रोताओं वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया एवं कहा कि ऐसा आयोजन भगवान की इच्छा से ही संभव हो पाता है। इस आयोजन के लिए प्रभु श्री रामचंद्र जी को नमन एवं धन्यवाद देना चाहिए। इस प्रवचन माला के आयोजन में मानस प्रचार समिति के संयोजक नेहरू प्रधान, कोषाध्यक्ष काशीराम पटेल, उमाशंकर पटेल आदि का योगदान प्रसंनीय रहा।



