छत्तीसगढ़

कस्तूरबा आवासीय विद्यालय बिलाईगढ़ में विधिक जागरूकता शिविर संपन्न…

छात्राओं को गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम, बाल विवाह व मोटर व्हीकल एक्ट की दी गई जानकारी...

बिलाईगढ़-तालुका विधिक सेवा समिति बिलाईगढ़ के तत्वावधान में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, बिलाईगढ़ में गुरुवार को विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में व्यवहार न्यायालय बिलाईगढ़ की न्यायाधीश सुश्री प्रेरणा वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ अधिवक्ता यज्ञ कुमार सिंह, विधिक वॉलिंटियर सूर्यकुमार, सीमा साहू, रमेश चौहान, तथा विद्यालय की अधीक्षिका और शिक्षिकाएँ भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।
शिविर में लगभग 45 से 50 छात्राओं ने भाग लिया। सभी ने विभिन्न कानूनी विषयों पर रुचि लेकर प्रश्न पूछे और जानकारी प्राप्त की।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर न्यायाधीश प्रेरणा वर्मा का प्रेरक संबोधन…
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायाधीश प्रेरणा वर्मा ने छात्राओं से कहा यदि हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे, तो पढ़ाई में मन लगेगा और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकेंगे। खराब स्वास्थ्य न केवल हमें कमजोर बनाता है, बल्कि यह आर्थिक और मानसिक परेशानियों का भी कारण बनता है। कई बार मानसिक विकृति अपराध की जड़ होती है।उन्होंने छात्राओं को अच्छे स्वास्थ्य के महत्व पर बल देते हुए बताया कि स्वस्थ शरीर ही सफल जीवन की नींव है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने मन और शरीर दोनों को संतुलित रखें और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएं।

कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी गई…
न्यायाधीश वर्मा ने शिविर में छात्राओं को गुड टच-बैड टच, चोरी, छेड़छाड़, व्यपहरण (किडनैपिंग), साइबर क्राइम, बाल विवाह, और मोटर व्हीकल एक्ट जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।उन्होंने समझाया कि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अनुचित व्यवहार को चुपचाप सहना नहीं चाहिए, बल्कि तत्काल किसी विश्वसनीय व्यक्ति, शिक्षक या पुलिस अधिकारी को इसकी सूचना देनी चाहिए।गुड टच और बैड टच को पहचानना आत्मरक्षा का पहला कदम है। डरने की नहीं, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है।

साइबर क्राइम से सावधान रहने की दी सलाह…
इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ते उपयोग को देखते हुए न्यायाधीश वर्मा ने छात्राओं को साइबर अपराधों से सावधान रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें और किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत न करें।ऑनलाइन ठगी, फेक प्रोफाइल और साइबर से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

बाल विवाह को बताया कानूनी अपराध…
न्यायाधीश वर्मा ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत इसकी जानकारी संबंधित प्रशासन या पुलिस को दें।
बाल विवाह न केवल एक अपराध है, बल्कि यह बालिकाओं के भविष्य और शिक्षा को समाप्त कर देता है

मोटर व्हीकल एक्ट पर जानकारी…
शिविर में मोटर व्हीकल एक्ट की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाना गैरकानूनी है। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की स्थिति में उनके अभिभावक भी दंडनीय होते हैं। उन्होंने सभी से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की।

वॉलिंटियरों और अधिवक्ता का योगदान…
अधिवक्ता यज्ञ कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय केवल सजा देने का स्थान नहीं, बल्कि न्याय और संरक्षण का माध्यम है। उन्होंने विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि जरूरतमंद और गरीब लोगों को निःशुल्क कानूनी मदद दी जाती है।विधिक वॉलिंटियर सूर्यकुमार,सीमा साहू और रमेश चौहान ने भी छात्राओं को बताया कि जागरूकता ही अपराध रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।

छात्राओं की उत्साही भागीदारी…
शिविर के दौरान छात्राओं ने कई प्रश्न पूछे जिनका अतिथियों ने सहजता और सरल भाषा में उत्तर दिया। न्यायाधीश वर्मा ने छात्राओं को आत्मविश्वासी बनने, सत्य बोलने और कानून का सम्मान करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का समापन और आभार प्रदर्शन…
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की अधीक्षिका ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह शिविर छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी रहा और इससे उन्हें विधिक जागरूकता के साथ आत्मरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा भी मिली।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सभी उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे समाज में विधिक जागरूकता फैलाने में अपना योगदान देंगे और बालिकाओं की सुरक्षा एवं शिक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएँगे।कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, बिलाईगढ़ में आयोजित यह विधिक शिविर छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। इस पहल ने न केवल उन्हें कानून की समझ दी, बल्कि आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में एक सशक्त कदम भी साबित हुआ।

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