कलेक्टर डॉ कन्नौजे ने मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण, डबरी निर्माण और चेकडेम का निरीक्षण किया…
मनरेगा के सभी निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए : कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे...
कलेक्टर ने मनरेगा के निर्माण कार्यों का किया अवलोकन…
सारंगढ़ बिलाईगढ़ – कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने सारंगढ़ ब्लॉक के विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता और हितग्राहियों को मिल रहे लाभ की प्रत्यक्ष जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने ग्राम पंचायत हिर्री में चल रहे डबरी निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। यहां हितग्राही कमला भारद्वाज द्वारा डबरी का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डबरी निर्माण पूर्ण होने के बाद वे इसमें मछली पालन का कार्य प्रारंभ करेंगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। कलेक्टर डॉ कन्नौजे ने डबरी का गहरीकरण कराने के निर्देश दिए, ताकि अधिक मात्रा में वर्षा जल संचयन हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इसमें मछली बीज उत्पादन किया जाए तो लाभ और अधिक बढ़ सकता है। साथ ही हितग्राही को ‘बिहान’ समूह से जोड़ने के निर्देश भी दिए, जिससे उन्हें शासकीय योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।
कलेक्टर ने ग्राम पंचायत मल्दा (ब) का निरीक्षण किया। यहां 30–40 मॉडल के अंतर्गत बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य किया गया है। हितग्राही कमल प्रसाद बरिहा ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत एक एकड़ भूमि पर यह कार्य कराया गया है। पहले यह भूमि पूरी तरह बंजर थी, लेकिन अब जल संरक्षण कार्य के कारण इसमें पानी का ठहराव संभव हुआ है। वे इस भूमि पर नींबू की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का साधन मिलेगा। इसी प्रकार ग्रामीण अर्जुन यादव ने भी बताया कि पहले एक एकड़ जमीन अनुपयोगी थी, लेकिन मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों से वर्षा जल संरक्षण संभव होगा और भूमि की उत्पादकता में सुधार आएगा
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि मनरेगा के कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीनी स्तर पर निरीक्षण आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण हों तथा जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बंजर भूमि को भी खेती योग्य बनाकर ग्रामीणों की आय बढ़ाई जा सके। जिले में मनरेगा के तहत हो रहे ये कार्य न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।



