छत्तीसगढ़

कलेक्टर साहब का जनदर्शन—क्या सच में है समाधान, या केवल प्रशासन की बेहतर छवि का दिखावा ? …..तरुण खटकर…

सारंगढ़ बिलाईगढ़ – राज्य के सभी 33 जिलो में प्रत्येक सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में किसी एक दिन कलेक्टोरेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित होने वाला जनदर्शन कार्यक्रम जनता को उम्मीद दिलाता है कि कलेक्टर साहब उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे।

दूर -दराज गांवों,के साथ शहर के आम लोगों के साथ साथ जनप्रतिनिधि भी अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर आते हैं, और उन्हें उम्मीद रहती है कि प्रशासन की ओर से जल्दी कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

लेकिन सच्चाई क्या है? क्या कलेक्टर साहब वास्तव में इन शिकायतों का समाधान करते हैं, या यह जनदर्शन सिर्फ सरकार की छवि सुधारने का एक माध्यम बनकर रह गया है? यह सवाल तब उठता है जब शिकायतों के समाधान के आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं किए जाते।
और न किसी दोषी प्रशासनिक अधिकारियों पर कोई बड़ा कार्यवाही होता ।
जनदर्शन कार्यक्रम में सैकड़ों लोग अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं, और कलेक्टर से यह उम्मीद करते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र होगा। लेकिन इस कार्यक्रम के बारे में कोई ठोस जानकारी या आंकड़े सार्वजनिक नहीं होते। कितने मामलों का समाधान हुआ है, कितने लोगों की समस्याएं हल हुईं, और कितनी शिकायतों का हल नहीं निकल सका। यह एक बड़ा सवाल है। शायद यह सब सिर्फ अखबारों की सुर्खियां बनाने और शासन-प्रशासन की सुंदर छवि बनाने के लिए होता है।

*क्या आवेदनों का हुआ समाधान ?*

सिर्फ आंकड़ों के जरिए ही यह साबित किया जा सकता है कि कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम से लोगों को कितना लाभ हुआ है। अगर आवेदनों का समाधान हुआ है, तो क्यों न इन्हें जनता के सामने लाया जाए? लेकिन इस बारे में कोई भी स्पष्टीकरण सामने नहीं आता।

छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों मे कलेक्टरों का अपने अपने जिलों में महीनों या सालों से अधिक समय का कार्यकाल हो चुका है, और वे दर्जनों बार जनदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं, लेकिन क्या इन कार्यक्रमों में जुटी समस्याओं का समाधान हुआ? यह सवाल आज भी अनसुलझा है।

*आंकड़ों का खेल!*

इस दिनांक को जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान कुल सौकडो शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन क्या इनमें से किसी का समाधान हुआ? या यह आंकड़ा सिर्फ एक और संख्या बनकर रह गया, जो अगले जनदर्शन में नया आंकड़ा जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा?

पिछले जनदर्शन कार्यक्रमों में कितने मामलों का समाधान हुआ, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया है। जनता को कब तक ऐसे आश्वासनों का सामना करना पड़ेगा, यह एक बड़ा सवाल है।

जनता का विश्वास कलेक्टर की जिम्मेदारी है इसलिए कलेक्टर और प्रशासन को जनदर्शन कार्यक्रम को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना चाहिए। अगर कलेक्टर साहब वास्तव में जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं, तो उनके द्वारा किए गए समाधान का आंकड़ा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को विश्वास हो कि उनका वक्त और मेहनत व्यर्थ नहीं गया। जब तक यह पारदर्शिता नहीं आती, तब तक यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता ही साबित होगा, जो प्रशासन की छवि चमकाने के अलावा कुछ नहीं करेगा। इसलिए, जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके आवेदनों का क्या हुआ, और कलेक्टर ने उनके लिए क्या कदम उठाए।

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