छत्तीसगढ़

एक दूसरे के पूरक: नेता और कार्यकर्ता….तरुण खटकर…

रायपुर – किसी भी संगठन या आंदोलन की सफलता के लिए नेता और कार्यकर्ता दोनों ही जरूरी हैं। उनकी भूमिकाएँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के पूरक हैं, और उनमें से किसी एक की भी‌ निष्क्रियता ,उपेक्षा या अनुपस्थिति वांछित परिणाम प्राप्त करना असंभव बना देती है।

यह ठीक उसी तरह है जैसे बिना फौज के सेनापति या बिना सेनापति के फौज अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकती।

एक *नेता* वह व्यक्ति होता है जो दूरदृष्टि रखता है, दिशा निर्धारित करता है, और लोगों को एक साझा लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है। वह रणनीतियाँ बनाता है, निर्णय लेता है, और मुश्किल समय में समूह का मार्गदर्शन करता है। एक सक्षम नेता में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, और लोगों को साथ लेकर चलने की कला होती है। वह अपनी बातों और कार्यों से कार्यकर्ताओं में उत्साह और समर्पण का भाव जगाता है।

दूसरी ओर, *कार्यकर्ता* वह व्यक्ति होता है जो नेता के दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करता है। वे संगठन की रीढ़ की हड्डी होते हैं, जो नीतियों और योजनाओं को लागू करते हैं, लोगों से जुड़ते हैं, और लक्ष्य प्राप्ति के लिए अथक प्रयास करते हैं। कार्यकर्ताओं का समर्पण, मेहनत, और निष्ठा किसी भी आंदोलन को गति प्रदान करती है।

कल्पना कीजिए एक *सेना* का। एक *सेनापति* युद्ध की रणनीति बनाता है, सैनिकों को निर्देश देता है, और उनका नेतृत्व करता है। लेकिन अगर उसके पास फौज ही न हो, तो उसकी रणनीति और नेतृत्व किस काम का? वह अकेले युद्ध नहीं जीत सकता।

इसी तरह, एक फौज बिना किसी सक्षम *सेनापति* के दिशाहीन हो जाएगी। उसमें साहस और शक्ति तो होगी, लेकिन उचित मार्गदर्शन के अभाव में वह तितर-बितर हो सकती है और अपने लक्ष्य से भटक सकती है।

ठीक यही सिद्धांत एक *संगठन* या आंदोलन पर भी लागू होता है। एक करिश्माई नेता बिना समर्पित कार्यकर्ताओं के अपने विचारों को साकार नहीं कर सकता। उसके पास चाहे कितनी भी अच्छी योजनाएँ हों, उन्हें ज़मीन पर उतारने और लोगों तक पहुँचाने के लिए कार्यकर्ताओं की आवश्यकता होती है।
वहीं, कार्यकर्ताओं का उत्साह और परिश्रम भी तब तक अधूरा है जब तक उन्हें एक सक्षम नेता से उचित दिशा और मार्गदर्शन न मिले।

एक कुशल नेता कार्यकर्ताओं की ऊर्जा को सही दिशा में प्रवाहित करता है और उन्हें संगठित होकर काम करने के लिए प्रेरित करता है।

संक्षेप में, *नेता और कार्यकर्ता* एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक दूरदर्शी नेता के बिना कार्यकर्ता दिशाहीन हो सकते हैं, और समर्पित कार्यकर्ताओं के बिना नेता की दूरदृष्टि अधूरी रह सकती है।

सफलता तभी संभव है जब दोनों मिलकर काम करें, एक दूसरे का सम्मान करें, और अपने-अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाएं।

इसलिए, किसी भी संगठन या आंदोलन के लिए एक मजबूत नेता और समर्पित कार्यकर्ताओं का होना उतना ही ज़रूरी है

जितना किसी युद्ध को जीतने के लिए एक कुशल सेनापति और एक अनुशासित फौज का।

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