ग्राम मिरचीद में सरपंच पर अवैध कब्जा एवं मनमानी का गंभीर आरोप, ग्रामवासियों में रोष…


बिलाईगढ़-जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत मिरचीद में पदस्थ सरपंच ललित कुमार साहू पर गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामवासी संतोष चौहान ने कलेक्टर महोदय को एक शिकायत पत्र सौंपा है। इस पत्र में सरपंच द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण करने, ग्रामवासियों से मनमाने तरीके से जुर्माना वसूलने, शराब बिक्री को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीणों को डराने-धमकाने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता संतोष चौहान, जो स्वयं ग्राम मिरचीद का निवासी है, ने आरोप लगाया कि सरपंच ललित साहू ने ग्राम पंचायत मिरचीद के प.ह.नं.04 के समीप समलाई चौक के पास स्थित शासकीय भूमि पर बेजा कब्जा कर वहां मकान बनाया है और वह स्वयं उसी मकान में निवास कर रहा है। इतना ही नहीं, उसने महानदी के किनारे आम रास्ते पर भी शासकीय भूमि पर कब्जा कर घर और बाड़ी बना ली है, जिससे आमजन का रास्ता बाधित हो रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरपंच ग्राम में सत्ता के दुरुपयोग से बैठक बुलाकर ग्रामीणों पर मनमाने ढंग से 50-60 हजार रुपये का जुर्माना लगाता है और उक्त राशि स्वयं वसूल कर लेता है। सरपंच की यह कार्यशैली न केवल अनुचित है बल्कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 36(घ) के अंतर्गत सरपंच को अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत करती है।
इसके अतिरिक्त यह भी आरोप है कि सरपंच द्वारा अवैध रूप से ग्राम में शराब बेचवाया जाता है और स्वयं वसूली करता है। यदि कोई व्यक्ति शराब नहीं बेचता तो भी उसे झूठे आरोपों में फंसा कर 50 से 60 हजार रुपये की अवैध वसूली की जाती है। ऐसा नहीं करने पर पुलिस में झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है।
शिकायतकर्ता ने उदाहरण स्वरूप बताया कि एक ग्रामीण महिला पिंकी पति हरि केंवट’ को भी सरपंच के द्वारा शराब बेचने का झूठा आरोप लगाकर 50 हजार रुपये की वसूली के लिए धमकाया गया। जब उसने पैसा देने से इंकार किया तो उसे पुलिस में झूठा फंसाने की धमकी दी गई। ऐसे अनेक ग्रामीण इस प्रकार की प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।
ग्रामवासियों का कहना है कि सरपंच ललित साहू ग्राम में पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप को रोकता है ताकि उसके द्वारा की जा रही गैरकानूनी गतिविधियाँ उजागर न हों। इससे गांव में कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो रही है और आम लोग भय के वातावरण में जीने को मजबूर हैं।
ग्राम मिरचीद के निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरपंच द्वारा की गई मनमानी व भ्रष्ट गतिविधियों के कारण ग्राम पंचायत की छवि धूमिल हो रही है और शासन की योजनाओं का लाभ भी पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में ग्रामवासियों ने एकजुट होकर सरपंच को हटाने की मांग की है ताकि ग्राम में शांति एवं न्यायपूर्ण प्रशासन स्थापित हो सके।
शिकायतकर्ता ने इस पत्र की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बिलाईगढ़ तथा तहसीलदार बिलाईगढ़ को भी भेजते हुए शीघ्र जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
*कानूनी दृष्टिकोण से गंभीर मामला*
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 36(थ) के अनुसार यदि कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुंचाता है, उसका दुरुपयोग करता है या शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करता है, तो वह अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। इस अधिनियम के तहत शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी जांच कर सकते हैं और दोषी पाए जाने पर सरपंच को पद से पृथक किया जा सकता है।
*प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव*
अब यह मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुका है। ग्रामवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी सरपंच के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे न केवल ग्राम मिरचीद में कानून का राज स्थापित होगा बल्कि अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
*ग्रामवासियों की मांग*
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे की जांच की जाए।जुर्माना वसूली, अवैध शराब बिक्री और धमकी जैसे आरोपों की विस्तृत जांच की जाए।दोषी पाए जाने पर सरपंच को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।ग्राम पंचायत में पारदर्शी प्रशासन की बहाली सुनिश्चित की जाए।
*इस संबंध में ग्राम पंचायत मिरचीद के सरपंच ललीत साहू का कहना है कि*
मेरे विरुद्ध गलत शिकायत किया गया है मैं कोई अवैध कब्जा नही किया हुं मैं जिस मकान में रहता हूं वो पैतृक संपत्ति है और वो मकान मेरे पिता का है।




