सहकारिता विभाग में अनियमितता और प्राधिकृत अधिकारी की मनमानी पर पूर्व समिति प्रबंधक का आरोप…

बिलाईगढ़
– प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति सलौनीकला पंजीयन क्रमांक 1309 में कार्यरत रहे पूर्व प्रभारी समिति प्रबंधक संजय कुमार साहू ने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए समिति में चल रही अनियमितताओं, प्राधिकृत अधिकारी की मनमानी कार्यवाहियों और बैंक खातों के संचालन में पारदर्शिता की कमी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में 8 बिंदुओं में विस्तृत रूप से अनियमितताओं की जानकारी देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्राधिकृत अधिकारी द्वारा मनमानी का आरोप…
शिकायतकर्ता संजय कुमार साहू का कहना है कि उन्हें दिनांक 22 नवम्बर 2024 को प्राधिकृत अधिकारी महेत्तर लाल श्रीवास द्वारा प्रभारी पद से हटा दिया गया था, जबकि उन्हें वास्तविक रूप से चार्ज दिनांक 26 नवम्बर 2024 को सौंपा गया था। इस विरोधाभास पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्हें पहले ही पद से मुक्त कर दिया गया था तो चार दिन बाद चार्ज देने की प्रक्रिया क्यों अपनाई गई?
इस संबंध में उन्होंने शिविल कोर्ट के आदेश की प्रति भी संलग्न करते हुए दावा किया है कि उनकी पदमुक्ति की प्रक्रिया नियमानुसार नहीं हुई है।
बैंक खातों में संयुक्त हस्ताक्षर की प्रक्रिया में अनियमितता…
दिनांक 4 दिसंबर 2024 को समिति के समस्त खातों में लेन-देन हेतु प्राधिकृत अधिकारी महेत्तर लाल श्रीवास एवं प्रभारी प्रबंधक भरत कुमार चंद्राकर के संयुक्त हस्ताक्षर से ही स्वीकृति प्रदान की गई थी। किंतु, पूर्व प्रबंधक संजय कुमार का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे संबंधित बैंक दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। उन्होंने बैंक मैनेजर की मोहर व हस्ताक्षर युक्त ‘इस्पेसीमेन्ट’ की प्रति भी शिकायत के साथ प्रस्तुत की है।
फड़ प्रभारी को मनमाने ढंग से प्रभारमुक्त करने का मामला…
संजय साहू ने यह भी आरोप लगाया है कि दिनांक 13 दिसंबर 2024 को फड़ प्रभारी देवनारायण चंद्रा को प्राधिकृत अधिकारी और समिति प्रबंधक द्वारा प्रभार से मुक्त कर दिया गया, जबकि नया प्रभारी नियुक्त करने का आदेश दिनांक 17 दिसंबर 2024 को जारी हुआ। यह निर्णय सरकारी छुट्टी के दौरान लागू किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह आदेश पूर्वनियोजित एवं नियमों के विरुद्ध था। उन्होंने मांग की कि इस घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
धान खरीदी में फर्जीवाड़े का आरोप…
शिकायत पत्र में यह सबसे गंभीर आरोप है। संजय साहू ने आरोप लगाया है कि धान उपार्जन केंद्र सलौनीकला एवं सलीहाघाट में फर्जी धान खरीदी का खेल खेला गया, जिसमें 2381 बोरी फर्जी धान की खरीदी दर्शाई गई। उन्होंने दावा किया कि इसके लिए जानबूझकर 800-900 बोरी को 30-35 किलो की दर से भरा गया, जिससे धान की मात्रा अधिक दिखे।
प्रकरण की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब राम यादव और हमाल संघ की ओर से थाना भटगांव में शिकायत दर्ज की गई, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि संजय साहू, देवनारायण चंद्रा और उनकी पत्नी कमलेश चंद्रा इस फर्जीवाड़े में लिप्त थे। उनके द्वारा किसानों को डराया धमकाया गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। इस पूरे घटनाक्रम की नोटरी अधिवक्ता पुष्पा गुप्ता द्वारा नोटरी शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया है।
चार्ज सुपुर्द करने के बावजूद आरोपित किया गया…
दिनांक 28 दिसंबर 2024 को संजय साहू ने सभी रिकार्ड प्राधिकृत अधिकारी महेत्तर लाल श्रीवास के समक्ष वर्तमान प्रभारी भरत कुमार चंद्रा को सौंप दिए थे, जिसका सबूत ‘सुपूर्दनामे’ और ‘चार्जलिस्ट’ के माध्यम से है। इसके बावजूद उन्हें सलीहाघाट केंद्र के कार्य से पृथक कर दिया गया। साहू का कहना है कि उन्हें ना तो पृथकीकरण की सूचना दी गई, ना ही कोई लिखित आदेश प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे व्यक्तिगत द्वेष और प्राधिकृत अधिकारी की मनमानी बताया।
थाना भटगांव में दर्ज शिकायत और प्रशासनिक उपस्थिति…
24 जनवरी 2025 को समिति प्रबंधक द्वारा थाना भटगांव में एक शिकायत दी गई, जिसमें कहा गया कि संजय साहू देवनारायण चंद्रा और कमलेश चंद्रा पूरे दिन धान खरीदी केंद्र में बैठे रहे, जिससे स्टाफ भयभीत हो गया और कार्य में व्यवधान आया। लेकिन शिकायतकर्ता ने इस आरोप को गलत ठहराते हुए कहा कि उसी दिन SDM वर्षा बंसल, मंडी निरीक्षक, सचिव और बैंक मैनेजर भी उपस्थित थे और धान खरीदी प्रक्रिया चल रही थी। इसके साक्ष्य में उन्होंने गीता प्रसाद साहू और रामेश्वर चंद्रा के बयान का उल्लेख किया है, जो SDM द्वारा दर्ज किया गया था।
जवाबदेही के प्रश्न पर उठे सवाल…
संजय साहू ने अपने आवेदन में कहा है कि सभी कार्यवाहियों की सूचना नोडल अधिकारी, सहकारिता विस्तार अधिकारी और ब्रांच मैनेजर को समय पर दी गई थी। बावजूद इसके उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया, जो अनुचित है। उनका कहना है कि जब सभी अधिकारियों को जानकारी थी तो सभी को साथ में उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए, सिर्फ एक कर्मचारी को बलि का बकरा बनाना उचित नहीं है।
कार्यवाही रजिस्टर की निष्पक्ष जांच की मांग…
उन्होंने दिनांक 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक की पूरी कार्यवाही रजिस्टर की स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय जांच समिति द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग…
इस पूरे प्रकरण में संजय साहू ने जिला प्रशासन, विशेषकर कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ से अपील की है कि पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कराई जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान समिति के वर्तमान प्रबंधक, प्राधिकृत अधिकारी, फड़ प्रभारी, हमाल संघ, मंडी कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
संलग्न दस्तावेजों की सूची से प्रमाणों का समर्थन…
शिकायतकर्ता ने कुल 15 महत्वपूर्ण दस्तावेजों की छायाप्रति अपने आवेदन के साथ संलग्न की है, जिनमें विभिन्न तिथियों के आदेश, बैंक संबंधी दस्तावेज, सुपुर्दनामा, चार्जलिस्ट, नोटिस, थाने में की गई शिकायतें, और नोटरी शपथ पत्र शामिल हैं। यह सभी दस्तावेज पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि और तथ्यों की पुष्टि करते हैं।
समिति संचालन में पारदर्शिता की कमी, आदेशों में तिथियों का टकराव, प्रभारी कर्मचारियों की नियुक्ति और मुक्तिकरण की प्रक्रिया में अनियमितता, और सबसे महत्वपूर्ण धान उपार्जन में फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोप एक बड़े घोटाले की ओर संकेत करते हैं। यदि इन सभी आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल सहकारी समिति की साख को प्रभावित करेगा, बल्कि किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंचाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और क्या समिति की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।




