छत्तीसगढ़

ग्राम पंचायत मल्दी में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: सचिव पर फर्जी बिलिंग, अपात्र हितग्राहियों को लाभ और पारदर्शिता की अनदेखी के गंभीर आरोप…

बिलाईगढ़-ग्राम पंचायत मल्दी में वर्षों से पदस्थ सचिव श्रीमती मंजू भारती पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और योजनागत अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामवासियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बिलाईगढ़ को एक लिखित आवेदन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में सचिव के 5 वर्षों की दीर्घकालीन पदस्थापना पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, जो प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन बताई गई है।
ग्रामवासियों के अनुसार, सचिव के कार्यकाल में न केवल पंचायत के फंड का दुरुपयोग हुआ, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अपारदर्शिता, फर्जी बिलिंग और अपात्र व्यक्तियों को लाभ देने जैसे कृत्य भी सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, ग्रामवासी अब आंदोलन की चेतावनी भी दे चुके हैं।
*पंचायत योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप*
ग्रामवासियों ने अपने आवेदन में विस्तारपूर्वक बताया है कि पंचायत की विभिन्न योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। इसमें विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का दुरुपयोग, फर्जी वाउचर और बिल के ज़रिए भुगतान, तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से वंचित रखने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
*फर्जी बिलिंग के मामले-लाखों के आंकड़े में भ्रष्टाचार का शक*
आवेदन के अनुसार ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सार्वजनिक आंकड़ों में वर्ष 2025 में कुल ₹4,18,465 की राशि खर्च दिखलाई गई है, जिसमें ₹3,95,000 की राशि पर गबन और फर्जी बिलिंग के आरोप हैं।
विशेष उदाहरणों में बताया गया है कि:
आश्रित ग्राम बगलोटा के तालाब पर लगे हैंडपंप की मरम्मत में वास्तविक लागत ₹12,000 थी, लेकिन सचिव द्वारा ₹1,01,840 का बिल प्रस्तुत किया गया, जो 8 गुना अधिक है।
ग्राम पंचायत मल्दी के दोनों गांवों में किसी भी प्रकार की रोड मरम्मत कार्य नहीं हुआ, फिर भी ₹35,900 का फर्जी बिल जारी किया गया।
और भी ऐसे कई कार्यों के लिए बिना भौतिक सत्यापन के बिलिंग कर लाखों की राशि खर्च दिखाई गई है।
ग्रामवासियों ने इन सभी कार्यों का तकनीकी और भौतिक सत्यापन कराए जाने की मांग की है, जिससे कथित घोटालों का पर्दाफाश हो सके।
*दीर्घकालीन पदस्थापना पर उठे सवाल*
सचिव श्रीमती मंजू भारती की लगातार 5 वर्षों से ग्राम पंचायत मल्दी में पदस्थापना भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिवों का लगातार इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर कार्यरत रहना नियमों के विरुद्ध है, और इससे भ्रष्टाचार और गुटबाजी को बढ़ावा मिलता है।
प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार एक सचिव की एक ही पंचायत में अधिकतम पदस्थापना अवधि 2 से 3 वर्ष मानी जाती है। ऐसे में 5 वर्षों तक एक ही पंचायत में कार्यरत रहना अनुशासनहीनता और पक्षपातपूर्ण प्रशासनिक रवैये का संकेत देता है।
*ग्रामवासियों के अन्य आरोप*
सचिव पर लगाए गए अन्य आरोपों में:
जनम-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ग्रामीणों से पैसे लेना, जो कि पूर्णतः अवैध और अमानवीय कृत्य है।
ग्राम पंचायत की बैठकों में पारदर्शिता की कमी और आमजन से जुड़ी समस्याओं का समाधान न करना।
योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक नहीं पहुंचाना और ग्रामसभा के आयोजन में उदासीनता।
*ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का खुलासा*
ग्रामवासियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों से यह साफ होता है कि योजनाओं पर दर्शाया गया खर्च और जमीन पर कार्यान्वयन के बीच भारी अंतर है।
यह पोर्टल भारत सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन यदि इसमें दिखाए गए आंकड़े जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय अपराध बन जाता है।
*ग्रामीणों की मांगें-जांच, निलंबन और स्थानांतरण*
आवेदन में ग्रामवासियों ने 4 प्रमुख मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं:
1. सचिव श्रीमती मंजू भारती को तत्काल ग्राम पंचायत मल्दी से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
2. बीते 5 वर्षों में हुए सभी विकास कार्यों की स्वतंत्र ऑडिट और तकनीकी जांच कराई जाए।
3. सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, जिससे जांच निष्पक्ष रूप से की जा सके।
4. गबन की गई राशि की वसूली कर उसे ग्राम पंचायत के खाते में वापस जमा कराया जाए।
*प्रशासन को घेराव की चेतावनी*
ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन करेंगे, और इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
*क्या कहते हैं पंचायत विशेषज्ञ*
इस प्रकरण पर स्थानीय पंचायत विशेषज्ञ श्री शर्मा ने कहा:
“एक ही पंचायत में सचिव की दीर्घकालीन पदस्थापना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भ्रष्टाचार को जन्म देने वाला सबसे बड़ा कारण भी बनती है। यदि बिलिंग में इतनी बड़ी असमानता पाई जाती है, तो जांच अपरिहार्य है।”
*क्या कहता है कानून?*
पंचायती राज अधिनियम, छत्तीसगढ़ एवं भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार:
किसी भी सचिव को अधिकतम 2 से 3 वर्षों से अधिक समय तक एक ही पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जा सकता।
योजनाओं की राशि का उपयोग पारदर्शी और सार्वजनिक जानकारी में होना अनिवार्य है।
फर्जी बिलिंग और गबन पर प्रशासन को तुरंत वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट बनाकर FIR दर्ज करनी होती है।
*प्रशासन की चुप्पी से असंतुष्ट ग्रामीण*
अब तक प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और आक्रोश दोनों गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जनांदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।

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