अवैध शराब की बिक्री बनी ग्रामीणों के लिए अभिशाप, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित…




बिलाईगढ़-बिलाईगढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सोनियाडीह में अवैध शराब बिक्री का मामला दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेता जा रहा है। गाँव के दर्जनों निवासी और महिला समिति के सदस्य पुलिस अधीक्षक को एक संयुक्त शिकायती आवेदन सौंप चुके हैं, जिसमें उन्होंने दो व्यक्तियों तुलसी पिता मोहीत साहू एवं विन्दा बाई पति तुलसीराम साहू के विरुद्ध अवैध शराब बिक्री करने के स्पष्ट आरोप लगाए हैं।
यह मामला न केवल अवैध व्यापार का है, बल्कि इससे उत्पन्न हो रही सामाजिक अव्यवस्था, महिला सुरक्षा पर खतरा, और प्रशासन की निष्क्रियता का भी एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
शिकायत की मुख्य बातें-
1. खुलेआम अवैध शराब की बिक्री:
ग्रामवासियों का कहना है कि उपरोक्त दोनों व्यक्तियों द्वारा लंबे समय से गाँव में अवैध शराब बेची जा रही है। यह गतिविधि खुलेआम सड़क किनारे, नदी किनारे एवं गाँव के विभिन्न हिस्सों में की जाती है।
2. शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं:
ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गाँव के लोग और महिला समिति की सदस्य मिलकर थाना बिलाईगढ़ पहुँचे थे और लिखित में शिकायत दर्ज करवाई थी। लेकिन, पुलिस द्वारा मामले को “समझौते” की शक्ल देकर वापस भेज दिया गया और आज दिनांक तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
3. धमकियाँ और दबंगई:
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब ग्रामीणों ने शराब बेचने से मना किया, तो संबंधित लोगों ने खुलेआम धमकी दी।थाना-कचहरी तो मैं निपटा चुका हूँ। जो करना है कर लो।”
यह कथन ना केवल आपराधिक मनोवृत्ति को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई को भी उजागर करता है।
4. महिलाओं की सुरक्षा पर संकट:
गाँव की सड़कों पर, विशेषकर नदी किनारे, शराब पीने वालों के अड्डे बन चुके हैं। शराब सेवन के बाद अश्लील हरकतें, गाली-गलौज, और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे महिलाओं का आना-जाना दुश्वार हो गया है। ग्रामीण महिलाओं को घर से निकलते समय भय सताने लगा है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाए।
ग्रामीणों की व्यथा: एक समाजिक तंत्र की टूटन-
हमारे संवाददाता ने सोनियाडीह गाँव के कुछ प्रमुख ग्रामीणों से बात की, जिनकी बातें न केवल दुःखद थीं, बल्कि चिंताजनक भी।शिकायत कर्ताओं का कहना है हम हर रोज़ डर के माहौल में जी रहे हैं। शराब पीकर लोग रास्ता रोकते हैं, गंदी बातें करते हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगता है।थाना जाकर पूरी बात रखी, लेकिन पुलिस वालों ने कोई खास ध्यान नहीं दिया। एक-दो दिन के लिए सब शांत होता है, फिर वही हाल।हमने सोचा था, शासन-प्रशासन हमारे साथ है, लेकिन यहाँ तो गुंडों को ही खुली छूट है।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल…
यह मामला प्रशासनिक उदासीनता का भी संकेत देता है। जब ग्रामीण शिकायत करने के बाद भी न्याय न पाएँ, और आरोपी खुलेआम कहें कि मैंने थाना-कचहरी देख लिया है,तो यह न केवल ग्रामीणों का मनोबल गिराता है, बल्कि पुलिस पर लोगों का भरोसा भी डगमगाता है।
ऐसे में बिलाईगढ़ थाना प्रभारी एवं पुलिस अधीक्षक को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक इस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, किन कारणों से तत्काल कदम नहीं उठाया गया, और भविष्य में क्या रणनीति बनाई जा रही है।
क्या कहते हैं कानून और सरकार की नीतियाँ?…
छत्तीसगढ़ सरकार ने शराबबंदी को लेकर समय-समय पर सख्त रवैया अपनाया है। कई जिलों में अवैध शराब के विरुद्ध छापे, गिरफ्तारी, और भारी जुर्माना लगाए जा चुके हैं।
मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की संयुक्त आबकारी नीति के तहत अवैध शराब की बिक्री, निर्माण, या वितरण दंडनीय अपराध है।इसके अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 3 से 7 वर्ष तक की जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना और गाली-गलौज करना दंडनीय है, और संबंधित धाराओं में तुरंत गिरफ्तारी की जा सकती है।फिर भी, यदि एक पंचायत में महीनों से अवैध शराब बेची जा रही है और पुलिस मूकदर्शक बनी है, तो यह सरकार की नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच भारी अंतर को उजागर करता है।
महिलाओं की दुर्दशा: समाज की असली चिंता…
इस मामले का सबसे संवेदनशील पक्ष है महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान। जब कोई महिला सड़क पर सुरक्षित न महसूस करे, तो वह गाँव कितना भी विकसित क्यों न हो, वहाँ की स्थिति शर्मनाक ही कहलाएगी।
ग्रामीण महिलाएं कहती हैं कि…
शराब पीने वाले रास्ता रोककर अभद्र इशारे करते हैं,गालियाँ, शारीरिक इशारे, और पीछा करना आम हो गया है,बच्चियों को अकेले स्कूल भेजने में डर लगता है,कोई रोकने जाए तो धमकी और दबाव आता है,यह स्थिति किसी एक महिला की नहीं, पूरी पंचायत की पीड़ा है।
समाज में फैलती अशांति और युवाओं पर असर…
इस तरह की गतिविधियों से समाज में
कानून का डर समाप्त हो जाता है
युवाओं को गलत प्रेरणा मिलती है
घरेलू हिंसा, चोरी, मारपीट जैसी घटनाएँ बढ़ती हैं,नशे की लत फैलती है, विशेषकर गरीब तबके में यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो यह केवल सोनियाडीह तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के गाँवों में भी इसी तरह के मामले सामने आ सकते हैं।
क्या करना चाहिए प्रशासन को…
1.तत्काल छापेमारी-
शिकायत में नामित व्यक्तियों के ठिकानों पर पुलिस व आबकारी विभाग की संयुक्त छापेमारी की जाए।2. निगरानी टीम बनाएँ-
गाँव में महिला समिति, युवाओं, और प्रशासनिक प्रतिनिधियों की एक टीम बने, जो अवैध गतिविधियों पर नजर रखे।
3.पुलिस पेट्रोलिंग बढ़े-
नदी किनारे, स्कूल मार्ग, और प्रमुख सड़कों पर रात-दिन गश्ती दल तैनात हो।
4 नशा मुक्ति अभियान चलाया जाए:
ग्राम स्तर पर जागरूकता शिविर, पोस्टर, और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर नशे के दुष्प्रभाव बताए जाएँ।
5.दोषियों को कड़ी सजा मिले:
ऐसे मामलों में जल्द से जल्द चालान पेश हो, और आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए, जिससे समाज में संदेश जाए कि कानून कमजोर नहीं है।
सूचना की प्रति किन-किन को भेजी गई है…
ग्रामवासियों द्वारा यह शिकायत पुलिस अधीक्षक सारंगढ को संबोधित की गई है, और इसकी प्रतियाँ निम्नलिखित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है जिसमे श्रीमान कलेक्टर सारंगढ, थाना प्रभारी बिलाईगढ़, एस पी सारंगढ,विधायक बिलाईगढ़ को दी गई है,विधायक कविता प्राण लहरे ने भी शराबबंदी का समर्थन किया है।
इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण अब शांत बैठने के मूड में नहीं हैं। यदि उन्हें प्रशासनिक मदद नहीं मिली, तो आने वाले समय में आंदोलन या धरना प्रदर्शन की स्थिति भी बन सकती है।




